पैसे देकर पुलिस की नौकरी छोड़ रहे हैं युवा

Youth Quit Police Job

सरकारी नौकरी पाने के लिए रुपए देने या सिफारिश कराने के कई केस आपने सुने होंगे लेकिन राज्य के युवा नौकरी (Youth Quit Police Job ) छोड़ने के लिए रुपए देने के लिए तैयार हैं। जी हां, पुलिस विभाग में कार्यरत युवा पुलिस की नौकरी नहीं करना चाहते हैं, इसीलिए नौकरी छोड़ने के लिए आवेदन कर रहे हैं। पुलिस विभाग ने ऐसे युवाओं को नौकरी छोड़ने की स्वीकृति देने से पूर्व इनकी ट्रेनिंग और वेतन भत्तों पर खर्च की गई रकम वापस लौटाने को कहा है। इसके बावजूद युवा पुलिस विभाग को रुपए लौटाने को तैयार हैं लेकिन पुलिस की नौकरी नहीं करना चाहते।

 

 

 

पुलिस विभाग में नौकरी छोड़ने वाले पुलिसकर्मियों (Youth Quit Police Job ) की संख्या बढ़ती जा रही है। नए पुलिसकर्मी इस विभाग में नौकरी करने की बजाय दूसरे विभागों में नौकरी करना चाहते हैं। इसके लिए वह बिना अनुमति के प्रतियोगी परीक्षा भी दे रहे हैं। राज्य के सभी जिलों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं,जहां पुलिसकर्मी की दूसरे विभाग में नौकरी लगने पर उसने पुलिस विभाग को छोड़ने का निर्णय लिया है। एक वर्ष में औसतन पांच सौ से अधिक पुलिसकर्मी नौकरी छोड़ देते हैं। केवल बीकानेर संभाग में बीते तीन वर्षो में करीब दो सौ पुलिसकर्मी सिपाही की नौकरी छोड़कर पीओ, शिक्षक,क्लर्क, बैंककर्मी की नौकरी ज्वाइन कर चुके हैं। नौकरी छोड़ते समय ऐसे युवक- युवतियों को टेनिंग पर हुए खर्च को भी लौटाना पड़ा है।

 

 

 

नौकरी छोड़ने का यह है सबसे बड़ा कारण

पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ने का सबसे बड़ा कारण काम का बोझ और पुलिस की घटती साख है। इस कारण युवाओं का कांस्टेबल की नौकरी से मोहभंग हो रहा है। पुलिस विभाग में न तो डयूटी टाइम का पता है और ना ही अवकाश मिलता है। अवकाश के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाना तक पड़ता है। सिपाही के शोषण के कई मामले सामने आते रहते हैं। कभी वर्दी की नौकरी का आकर्षण अब धीरे-धीरे गायब हो रहा है। बेरोजगारी से परेशान युवा एक बार कांस्टेबल की नौकरी करना शुरू कर देते हैं लेकिन
अवसर मिलते ही नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी की तरफ बढ़ जाते हैं।

 

 

 

कार्यमुक्त होना है तो लौटाए वेतन और प्रशिक्षण राशि

चितौड़गढ़ जिले में तृतीय श्रेणी शिक्षक के पद पर चयनित हुए एक पुलिसकर्मी को कार्यमुक्त (Youth Quit Police Job ) होने के लिए नौ लाख रुपए विभाग में जमा करवाने के लिए कहा गया है। यह राशि उसे अभी तक मिले वेतन और प्रशिक्षण की है। पुलिस लाइन में तैनात सीताराम का तृतीय श्रेणी शिक्षक के पद पर चयन हुआ था। सीताराम ने उन्हें कार्यमुक्त कर शिक्षा विभाग में डयूटी ज्वाइन करने के लिए पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र लिखा था। इसके जवाब में विभाग ने पहले यह राशि जमा करवाने का आदेश दिया। पलाना निवासी बंशीलाल गोदारा ने शिक्षक की नौकरी लगने पर डेढ़ लाख रुपए जमा करवाकर त्याग पत्र दे दिया वहीं श्रीकोलायत निवासी इन्द्रजीत बाना ने
बिना अनुमति के प्रतियोगी परीक्षा दी और नौकरी मिलने पर पचास हजार रुपए जमा कर त्याग पत्र दे दिया।

 

 

 

बोन्ड शर्तो की पालना जरुरी 

पुलिस विभाग ने नौकरी छोड़ने वाले पुलिसकर्मियों को नियुक्ति के समय भरे गए बोन्ड की शर्तो की याद दिलाई है। विभाग ने छह मार्च को इस संबंध में एक आदेश भी जारी किया था। इसके तहत ऐसे पुलिसकर्मियों को नियुक्ति से अब तक उठाया गया वेतन और बेसिक प्रशिक्षण खर्च की राशि लौटानी होगी। साथ ही एनओसी भी लेनी होगी ताकि नए पदस्थापन स्थल के लिए कार्यमुक्त किया जा सके।

 

 

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