सचिन पायलट को अब भी गले लगाने को क्यों तैयार हैं गहलोत

Rajasthan Politics Crisis Ashok Gehlots Statement On Sachin Pilot

Rajasthan Politics Crisis – मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने (Ashok Gehlot’s statement) कांग्रेस के बागियों को लेेकर बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने कहा कि यदि बागी आलाकमान के पास जाकर माफी मांगते है और आलाकमान उन्हें माफ कर देता है, तो वे भी उन्हें माफ कर गले लगा लेंगे।

 

 

 

अशोक गहलोत ने बड़ा बयान देते हुए कहा, अगर पार्टी आलाकमान बागियों को माफ कर दे तो वह उन्हें गले लगाने को तैयार हैं। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने मुझे बहुत कुछ दिया है। तीन बार सीएम बनाया। प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री और महासचिव रहा हूं। अब तो जो कुछ कर रहा काम कर रहा हूं वह पार्टी और जनता की सेवा के लिए कर रहा हूं। मेरा अपना कुछ नहीं है।

 

 

 

हालांकि इस बयान पर सचिन पायलट गुट की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस दौरान गहलोत ने केन्द्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के ट्वीट को लेकर कहा कि वे अपनी झेंप मिटाने के लिए कर रहे भ्रामक प्रचार कर रहे है। उन पर आरोप है,उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोरोना के बढ़ते हुए मामलों पर मुख्यमंत्रियों के साथ एक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करनी चाहिए, इसके लिए वह पत्र लिखेंगे।

 

 

 

पीएम मोदी पर सीएम का हमला

गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी की पार्टी चुनी हुई सरकारों (Rajasthan Politics Crisis )को गिराना चाह रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजस्थान में चल रहा तमाशा रोकना चाहिए। लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, कर्नाटक, गोवा, मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश में कैसे खेल हुआ सब जानते है। उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मायावती पर सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग का दबाव है, इसलिए वह हमारी सरकार को घेरने में जुटी हैं और इसीलिए सबक सिखाने से बातें बोल रही हैं। गहलोत ने कहा कि विधायकों को खरीदा जा रहा है। उन्हें पैसों का लालच दिया जा रहा है। हम इस देश का लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे है।

 

 

 

Rajasthan Politics Crisis -सुलह या सियासत

क्या राजस्थान का सियासी संकट सुलह की तरफ बढ़ रहा है? मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान (Ashok Gehlot’s statement) के सीधे तौर पर तो यही मायने लगाए जा सकते हैं। हालांकि इसके पीछे छुपी सियासत और मजबूरी भी नजर आ रही है। सचिन पायलट की नजर से देखें तो उनके पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। ऐसे में सुलह संभव है। वहीं 200 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 101 विधायकों की जरूरत है। गहलोत 102 विधायकों के साथ होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन, सच्चाई यह है कि उनके पास 100 विधायक ही हैं। माकपा के दोनों विधायक पहले साथ थे, अब तटस्थ हैं। ऐसे में गहलोत बहुमत के किनारे पर खड़े हैं। एक विधायक भी पाला बदले तो सरकार का गिरना तय है। ऐसे में गहलोत भी चाहते हैं कि विरोधी खेमे से सुलह करना ही बेहतर विकल्प हो सकता है।

 

 

 

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