राजभवन में शुरू हुआ सियासी ड्रामा, ये है असली वजह

Ashok Gehlot's political drama in Raj Bhavan

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी में चल रहा सियासी ड्रामा (Political Drama) सुप्रीम कोर्ट,हाईकोर्ट के बाद राजभवन ( Raj Bhavan) पहुंच गया है। पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत से शुरू हुए विवाद को सीएम गहलोत (Ashok Gehlot) राजभवन लेकर चले गए हैं। राजस्थान के सियासी घमासान का आज 15वां दिन है। विधायक विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। लेकिन राज्यपाल ने साफ कह दिया कि इतने शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाना संभव नहीं है।

 

 

 

सीएम अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाने का अनुरोध करने विधायकों के साथ बस में राजभवन पहुंचे। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि सीएम अशोक गहलोत बताएं कि आखिर वह विधानसभा का सत्र क्यों बुलाना चाहते हैं। फिलहाल राज्यपाल ने कहा है कि वह कानूनी सलाह लेने के बाद ही विधानसभा सत्र बुलाने पर फैसला लेंगे।

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विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत और राज्यपाल कलराज मिश्र आमने-सामने आ गए हैं। उधर, गहलोत के साथ पहुंचे विधायकों ने लॉन में बैठकर नारेबाजी की। इस सबके बीच पीसीसी अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा राजस्थान में लोकतंत्र की हत्या के षड़यंत्र के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध जताएंगे।

 

 

फ्लोर टेस्ट से पहले कोरोना टेस्ट !

कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से राज्यपाल अभी विधानसभा सत्र बुलाने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन, विधायक विधानसभा सत्र बुलाए जाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। राज्यपाल ने लॉन में बैठे विधायकों से मुलाकात की। उधर, कोरोना की वजह से सत्र नहीं बुलाए जाने की खबरों पर राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि हम 200 विधायकों का कोरोना टेस्ट करवाने को तैयार हैं।

 

 

 

कांग्रेस एमएलए ने किया राजभवन का घेराव

सीएम अशोक गहलोत अपने समर्थक कांग्रेस विधायकों के साथ बसों से शुक्रवार दोपहर राजभवन पहुंचे। बता दें कि ये सभी विधायक विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र से सामूहिक आग्रह करने पहुंचे हैं। माकपा के विधायक बलवान पूनियां और बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक भी इनमें शामिल हैं। इससे पहले गहलोत ने संवादाताओं से कहा कि राज्यपाल मिश्र ऊपर से दबाव के कारण विधानसभा सत्र नहीं बुला रहे हैं। राज्य में जारी सियासी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री गहलोत हफ्ते भर में तीन बार राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं।

 

 

कोर्ट में सांकेतिक हार से गहलोत खेमे में हताशा

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सचिन पायलट गुट के बागी विधायकों को थोड़ी राहत मिल गई है। इसे एक तरह से अशोक गहलोत खेमे की सांकेतिक हार मानी जा रही है। अब ऐसा लग रहा है कि इन बागी विधायकों की बर्खास्तगी नहीं हो सकेगी। जबकि गहलोत खेमा हर हाल में बर्खास्त कर दोबारा चुनाव चाहता है। इसलिए ही सीएम अशोक गहलोत विधानसभा में शक्ति प्रदर्शन करना चाहते हैं।

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